क्या भारत की New Vehicle Scrappage Policy ला पाएगी ट्रकिंग इंडस्ट्री का नया बिज़नस मॉडल

 

Indian Truck Market को समझने के लिए आपको उस फ़ूड चैन जैसे structure को बारीकी से समझना पड़ेगा जो इस सेगमेंट के लिए Consumer Behavior निर्धारित करता है|  यूँ तो ट्रक मार्किट को कई तरह से सेगमेंट में बांटा जा सकता है, मगर जब India’s New Vehicle Scrappage Policy   के Point of View से देखें तो यहाँ बुनियादी तौर पर यहाँ तीन तरह के खरीददार है| सबसे पहले हैं Big Institutional Buyers जो अपने सी ए की राय पर Depreciation शो करने के लिए हर साल अपनी फ्लीट से पुराने ट्रक निकालते हैं और नए ट्रक जोड़ते हैं| दूसरे है वो बायर्स जो technically sound हैं और बड़े बायर्स के ट्रक्स में Reinvest करके दोबारा नया बना देते हैं| तीसरे हैं Low frequency users, ये वो लोग है जिन्हें ट्रक की ज़रूरत कभी कभार पड़ती है|


बजाज का चेतक हो या टाटा का
407, बिकता re-sale वैल्यू के दम पर ही है

कल आज और कल, इंडियन ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में वाहन अक्सर करके उनके re-sale वैल्यू के मद्देनजर खरीदे जाते हैं| Hero Honda Splendor, बजाज चेतक और मारुती 800 जैसे कई लीडिंग ब्रांड्स इस बात की पुष्टि कर चुके हैं| ट्रकिंग वर्ल्ड में इस re-sale वैल्यू की काफी इम्पोर्टेंस है| किसी ट्रकिंग कंपनी के लिए ये एक नेगेटिव प्रोस्पेक्ट है जहाँ एक सक्सेसफुल प्रोडक्ट, Future Demand Curve को नुक्सान पहुंचाता है| आज ट्रकिंग कम्पनीज के बिजनेस मॉडल्स इस समस्या से जूझ रहे हैं| नयी कम्पनीज इस मार्किट की डिमांड और सप्लाई को Objective नज़रिए से नहीं देख पा रहीं हैं|



India’s New Vehicle Scrappage Policy दिखाती है एक नया रास्ता

India’s New Vehicle Scrappage Policy पुराने ट्रक्स को नयी वैल्यू चैन में डाल सकती है जहाँ एक रेगुलर Truck Manufacturer दोहरा लाभ उठा सकता है| सबसे पहले वो अपने पुराने कस्टमर को Value Chain के भीतर रह कर retain कर सकते हैं और दूसरा वो taxation और Government Patronage का फायदा भी उठा सकते हैं| अगर PESTAL analysis की स्केल पर देखा जाए तो ये कस्टमर और कंपनी दोनों के लिए Win-Win situation है| इस Win-Win Situation  को वर्कआउट करके एक नया बिज़नस मॉडल develop किया जा सकता है मगर उससे पहले आपको एक सवाल का जवाब सोचना पड़ेगा|



क्या आपने अपनी कंपनी का Digital Point of Purchase डेवलप कर लिया है?   

एक अनुमान के अनुसार भारत में बारह करोड़ से ज्यादा लोग डायरेक्टली ट्रकिंग व्यवसाय से जुड़े हुए हैं|  India’s New Vehicle Scrappage Policy के Implement होने के बाद  ट्रक मेकर्स के लिए बहुत ज़रूरी हो जाएगा जहाँ वो नियमित रूप से ट्रकिंग इंडस्ट्री के छोटे बड़े stakeholders के साथ एक डिजिटल प्लेटफार्म पर जुड़े और उन्हें लगातार Scrappage के benefit से परिचित करवाते रहे| ऐसा करके वो अपने लॉयल कस्टमर से तो जुड़ेंगे ही साथ ही साथ Look-Alike Big Data Modeling tool जैसे टूल्स की मदद से अपने rivals के stakes को भी challenge कर पायेंगे| आज ज़रूरत है, Hybrid Media Vehicles की जो End customers से अलग अलग प्लेटफॉर्म्स पर Similar message लेकर जाएं| SVI team सन 2018  से एक ऐसे ही व्हीकल पर काम कर रही है, जिसका अनावरण बहुत जल्द आप देख पायेंगे|

 


 

 

 

 

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