“सप्लाई से उपजती है डिमांड” के सिद्धांत को नकारता, घोर आर्थिक मंदी की तरफ बढ़ता अपना मोरेना शहर

 

क्या मोरेना शहर तैयार है एक एरो ड्रम के लिए ? हाल ही में हुए सर्वे को क्या मोरेना में रोज़गार सृजन से जोड़ कर देखा जा सकता है| बात अगर रोज़गार की है तो फिर हमें पिछले दिनों जिले के सांसद श्री नरेन्द्र सिंह तोमर के बयान की भी विवेचना की जा सकती है|


मोरेना से सांसद श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने रेत कारोबारियों और कुछ हज़ार परिवारों के हक़ में रेत खनन के पीछे की अर्थव्यवस्था की ओर इशारा किया| मोदी जी के एक्ट लोकल नारे के बाद यकीनन, शहर की अर्थव्यवस्था को एक माइक्रो-लेंस से देखने की ज़रूरत है| रेत खनन में जुड़े बहुत सारे लोग अर्थव्यवस्था के हाशिये पर है उन्हें भी रोज़गार का पूरा अधिकार है|



 इसी माइक्रो-लेंस से मोरेना के रेलवे मालगोदाम को भी  देखा जाना चाहिए | ये मालगोदाम रेलवे को सालाना पांच करोड़ की आय देता है| ये है डायरेक्ट इनकम फ्रॉम द एसेट, इस पांच करोड़ के मल्टीप्लायर ( जुड़े हुए व्यवसाय) तीस से पचास  करोड़  मूल्य का सामान मुरेना की लोकल अर्थव्यवस्था में पंप करते है | खाद, उर्वरक, सरसों और भी बहुत सारे एग्रो-इंडस्ट्रियल उत्पाद इस मालगोदाम के ज़रिये या तो मोरेना में आते हैं या फिर यहाँ से बाहर जाते हैं|

आर्थिंक मंदी के दौर में ये सिर्फ माल गोदाम नहीं इकनोमिक एक्टिविटी का हब भी है

कोरोना की दूसरी लहर के बाद आर्थिक मंदी की भी दूसरी लहर भी आएगी, पिछली लहर की मंदी ने महानगरो की कमर तोड़ी थी, इस लहर की मंदी के मुरेना जैसे छोटे शहरो मे बसे लोगो की जमा पूँजी पर डाका डाल सकती है| प्राइवेट स्कूल, कपड़ो के प्रतिष्ठान, मिठाई की दुकान, मंदी का शुरूआती असर सभी जगह दिखने लगा है| उपभोक्ता अपनी क्रय शक्ति के बारे में अनिश्चित है और निवेशक को भरोसा नहीं है की मार्किट के हालात पहले जैसे कब तक होंगे|

मालगोदाम मोरेना 


का करूँ सजनी आये ना बालम, का राग सुनाती मोरेना की नयी मालगोदाम रोड़ का दर्द भी समझिये

पिछले चार सालो से ट्रांसपोर्ट व्यवसाई नाला नम्बर एक को पाट कर बनाई गई  मालगोदाम रोड का इंतज़ार कर रहे थे| आज  नगर निगम के छाते तले ये रोड दुल्हन की तरह सजी मालगोदाम तक जाने वाहनों का आज  इंतज़ार कर रही है| माना जा रहा था की मालगोदाम रोड के आने के बाद ना सिर्फ इस मालगोदाम की आय में बढ़ोत्तरी होगी बल्कि लोकल स्तर पर रोज़गार का सृजन होगा| मगर इस बेचारी मालगोदाम रोड को कहाँ पता था की सुनहले सीमेंट की आभा में पूर्णिमा की चांदनी को मूंह चिढाती इस शानदार रोड़ को  मालगोदाम के ट्रक के दमदार टायरों की आवाज़ अब सुनाई देगी या नहीं इस पर शक है|

शहर का कौन है धनी धोरी ? सिसक रही है मालगोदाम पर बोरी

बेचारे मोरेनावासी, दो साल पहले विधान सभा में हुए तख्तापलट आन्दोनल के क्रन्तिकारी, आज भी उन करोडो की परियोजनाओ की राह देख रहे हैं जिनके वादे उनसे किये गए थे| वो तो कुछ हुआ नहीं, गाँठ का मालगोदाम और छीन लिया गया| स्वर्गीय श्री माधवराव सिंधिया के अथक प्रयासों ने जिस रेलवे स्टेशन को A list में डलवाया था, वो आज फिर से बी लिस्ट में आने के लिए तैयार है|



माना जा रहा था की मालगोदाम और अच्छी मालगोदाम रोड होने की वजह से मोरेना में व्यवसाय का केन्द्रिकरण होगा जिसके बाद और भी व्यवसाय प्रकाश में आयेंगे| जैसा की हर लोडिंग और अनलोडिंग के हब के साथ होता है, यहाँ पर कई तरह के हब बनेंगे और बाद में ये हब रोज़गार क्रिएट करेंगे|

जो छीना जा रहा है वो सिर्फ एक मालगोदाम और लोडिंग अनलोडिंग का स्टेशन भर नहीं है| वो मालगोदाम दरअसल उन संभावनाओ का हब है जो इस नवनिर्मित नगर निगम को व्यवसाय विकसित करने वाला इंटरफ़ेस दे सकता है| ये मालगोदाम वो सप्लाई क्रिएट करता है जो डिमांड क्रिएट कर सकती है|



मुरैना की त्रासदी देखिये, यहाँ के सांसद केंद्र सरकार के मंत्री है, ये शहर वो धुरी भी है जहाँ से वर्तमान राज्य सरकार के सत्ता में आने का रास्ता प्रशस्त हुआ था| ये वो शहर है जिसने श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को किंग मेकर  बनाने में अग्रणी भूमिका निभाई है| जिसका सिला ये मिल रहा है की शहर का मालगोदाम छीन लिया गया और ऐ ग्रेड रेलवे स्टेशन का दर्ज़ा भी छीन लिया गया|

याद रहे अगर ऐसा ही चलता रहा तो अब व्यवसाय के मयूर नए मालगोदाम के शहर रायरू के जंगलो में नाचेगे और मोरेना की बसी हुयी मंडी इस मंदी के दौर में बदहाली के बीहड़ो की शान में रोज़ नयी कहानिया लिखेगी|



Post a Comment

Previous Post Next Post