कांग्रेस का नया दावा, जमीन रजिस्ट्री छूट के मामले में शिवराज सरकार द्वारा प्रस्तुत महिला सशक्तिकरण का दायरा सिर्फ एकल महिला तक सीमित

 

मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया पेनलिस्ट अधिवक्ता पी कुमार द्विवेदी ने प्रचार और यथार्थ की एक विसंगति को मीडिया में प्रसारित करने का बीड़ा उठाया है| हाल ही में उन्होंने महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम के अंतर्गत घोषित रजिस्ट्री फीस में दो प्रतिशत की छूट के मुद्दे को नए तरीके से प्रस्तुत किया| ज्ञात है विगत दिनों माननीय शिवराज सिंह जी की ओर से घोषणा की गयी है की ज़मीन रजिस्ट्री में महिला का नाम शामिल होने पर रजिस्ट्री से जुड़े राजस्व में दो फीसदी की छूट दी जायेगी|

श्री द्विवेदी इस बाबत मीडिया को बताया की शिवराज सरकार के प्रचार तंत्र ने इस छूट को महिला सशक्तिकरण की दिशा में अग्रणी कदम की तरह प्रचारित किया था| मगर जब इस योजना का  गेजेट नोटिफिकेशन सामने आया तो पता चला की ये योजना सिर्फ उन महिलाओ पर लागू होगी जो मकान के ऊपर एकल मालिकाना हक रखती है| उनका कहना है की भारत में एकल परिवार के अन्दर भी पति और पत्नी दोनों मिलकर संयुक्त रूप से संपत्ति खरीदते हैं| इस नोटिफिकेशन की आलोचना करते हुए श्री द्विवेदी ने शिवराज सरकार की नीयत पर सवाल पर उठा दिए| वैसे अगर भारत की वर्तमान सामजिक परिपाटियो को anthropological point of view से स्टडी किया जाए तो समझ आता है की शहरो में और छोटे कस्बो में उभरे नए एकल परिवार ज़मीन और प्रॉपर्टी जॉइंट एकाउंट्स में खरीदते हैं, कई बार ये प्रॉपर्टी स्त्री धन के तौर पर भी खरीदी जाती है जहाँ लड़की के माँ बाप चाहते हैं की उसका नाम प्रॉपर्टी में शामिल हो| इस तरह की परिपाटी धीरे धीरे पनप रही है, नवविवाहित युगल को शादी से पूर्व अपना खुद का घर तोहफे में मिल जाए, ये परिकल्पना प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के स्वप्न से भी इत्तेफाक रखती है|

 मगर कांग्रेस प्रवक्ता द्विवेदी जी द्वारा उठाये गए सवालो की रोशनी में देखा जाए तो लगता है की सरकार की सोच, उनकी कथनी और उनकी करनी में ज़मीन आसमान का फर्क है| उनके द्वारा दिए गए बयान का आंकलन करके शिवराज सरकार को प्रचार प्रेमी सरकार भी कहा जा सकता है| गौर तलब है की कांग्रेस की ओर से इस तरह के आदेश आने से पहले भी आशंकाए जताई गई थी| कांग्रेस के प्रवक्ता श्री द्विवेदी का कहना है की एक ओर जब मोदी सरकार खुद सब्सिडी के फार्म में पति और पत्नी दोनों के नाम के साथ लिखे जाने की वकालत करती है, फिर शिवराज सरकार को इसमें क्या आपात्ति है, दरअसल दो प्रतिशत की छूट को एक सब्सिडी की तरह भी देखा जा सकता है|  

बहरहाल जनता जनार्दन चाहती है की इस नए आदेश की नीयत को साफ करने के लिए शिवराज सरकार को स्पष्टिकरण ज़रूर देना चाहिए| 2003 में कांग्रेस भी इसी तरह का एक क़ानून लायी थी, जिसका उद्देश्य था की रजिस्ट्री में महिला का नाम आते ही उसमें दो प्रतिशत की छूट मिल जाए| यहाँ पर कांग्रेस का इरादा साफ़ साफ समझा जा सकता था, वो चाहते थे की महिलाओ का नाम संपत्ति में आये, भले सम्पति को जॉइंट अकाउंट में यानी चाहे वो पुत्री की भूमिका में हो, पत्नी की भूमिका में हो या बहन की भूमिका में हो| इस तरह के क्लॉज़ से महिलाओं की भागीदारी भी बढती और उनका सशक्तिकरण भी होता| शिवराज सरकार ने कांग्रेस के इस कानून को abolish करके अपना अलग वर्शन प्रस्तुत किया और ये वर्शन कांग्रेस के अनुसार प्रासंगिक नहीं है क्यूंकि मध्य प्रदेश के सोशल कल्चर में अभी भी जॉइंट प्रॉपर्टीज खरीदी जाती है|



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