Indore Mayor Election 2021 Latest Update: क्या EVM से चुनाव चिन्ह हट जाएगा ? मतपत्रों में सिर्फ छपेंगे नाम और फोटो ?


 

Indore nagar nigam chunav 2021 को लगातार इन्टरनेट पर सर्च कर रहे लोगो को एक ज़रूरी खबर कहीं भी नज़र नहीं आ रही है| ये ज़रूरी खबर है उस याचिंका के बारे में जो भारत के अन्दर चुनावो की दशा और दिशा दोनों को बदल सकती है| वर्तमान राजनैतिक परिदृश्य को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट में बड़ी ही महत्वपूर्ण याचिका दाखिल की गई है । यह याचिका किसी औऱ दल के नही बल्कि केंद्र सरकार के BJP के नेता एवं वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दाखिल की है । उन्होंने इस याचिका में मांग की है कि मतपत्रों एवम EVM से राजनैतिक दलों के चुनाव चिन्ह हटाये जाएं और उनकी जगह प्रत्याशियों के नाम, उम्र, शैक्षणिक योग्यता और उनकी तस्वीर डाली जाय ।

पार्टी सिंबल और सरकार बनाने की desperation कहीं हमें लोकतंत्र के मवेशी-करण की ओर तो नहीं ले जा रही

Election in Mp 2021 के मद्देनज़र ये याचिका कई वाज़िब सवाल खड़े करती है जिनका सीधा सीधा ताल्लुक दल बदल क़ानून और लोकतंत्र के मवेशीकरण से भी है| बीते दिनों कुछ समाचार पत्रों ने चुटकी ली की श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया जी अभी भी आदतन कांग्रेस का नाम ले बैठते हैं| दल बदल के नाम पर विधायको को नस्ल बदलते तो आप अक्सर देखते ही रहते हैं| लोकतंत्र एक बहस है, युद्ध नहीं, मगर चुनाव चिन्ह और पार्टी सिंबल अक्सर इसे युद्ध का जामा पहना देते हैं जहाँ व्यक्ति पीछे रह जाता है और विचारधारा ऊपर आ जाती है, इसके बाद चुनाव चिन्ह और पार्टी की झंडे की खाल में छिपे भेडिये भी संसद तक पहुँच जाते हैं और मतदाता कसमसाता रह जाता है|

ऊपर लिखी बाते सुप्रीम कोर्ट में तो नहीं कही गई, मगर कहीं ना कहीं, सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत तथ्यों को इस भाषा में भी व्यक्त कर दिया जाये तो ज्यादा लोगो को आपत्ति नहीं होगी| सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस पर नोटिस जारी करने से इनकार कर दिया है और इसकी एक COPY अटार्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल को देने को कहा है ।इस पर सुनवाई को PENDING रखा है ।

कार्यवाही का Blow by Blow ब्यौरा

शुरुआती दौर में इस याचिका की सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट के CJI एस. ए. बोबडे ने पूछा कि अगर मतपत्र या EVM पर किसी पार्टी का चुनाव चिन्ह है तो ये मतदाताओ के लिए पक्षपात कैसे हुआ ? इस पर याचिकाकर्ता ने अपनी दलील में यह तर्क दिया कि इससे जो उम्मीदवार है उसके बारे में नही बल्कि पार्टी का वजन मतदाता के मानस पटल पर ज्यादा रहता है और इन्ही तथ्यों पर चुनाव आयोग को निर्देश देने की अपील की है ।

याचिका में यह भी कहा गया है कि चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल को गैर कानूनी, असंवेधानिक और इसे संविधान का उलंघन करने वाला घोषित किया जाय । याचिका में कहा गया है कि EVM से राजनैतिक दलों के चुनाव चिन्ह हटाकर उनके स्थान पर प्रत्याशियों के नाम, उम्र, शैक्षणिक योग्यता और उनकी तस्वीर लगाई जाए , इससे ना ही उम्मीदवार के बारे में मतदाताओं को सही जानकारी प्राप्त होगी बल्कि इससे राजनीति को भ्रष्टाचार और अपराधीकरण से मुक्त कराने में सफलता मिलेगी ।



याचिकाकर्ता की यह भी दलील है कि चुनाव चिन्ह के बगैर EVM से चुनाव कराने में पारदर्शिता आएगी । इससेमतदाता एक ईमानदार और साफ सुथरी छवि के योग्य प्रत्याशी को चुन सकेगा ।साथ ही राजनैतिक पार्टी के हाई कमान पर भी टिकिट वितरण में जो तानाशाही चलती है उस पर लगाम लगेगी और उसे भी जनता के सामने स्वच्छ छवि के प्रत्याशी को उतारने की बाध्यता होगी । और एक स्वच्छ और साफ सुथरे प्रत्याशियों के प्रतिस्पर्धा का चलन नए सोपान चढ़ने लगेगा ।

आंकड़ो को पढ़े तो लोकतंत्र के माछेर भात में सड़ी मछली की बू आती है 

याचिका कर्ता ने इसके लिए (ADR) गैर सरकारी संगठन असोसिएशन फ़ॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि पिछले 539 सांसदों में से 233 सांसदों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की घोषणा की है । 2014 के लोकसभा चुनाव में 542 सांसदों में से 185 सांसदों ने अपने खिलाफ अपराधिक मामलो की घोषणा की है । इससे पहले 2009 के लोकसभा चुनाव में 543 सांसदों में से 162 ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की घोषणा की थी और इसी आपराधिक स्थिति की मूल वजह ही मतपत्रों और EVM में चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल को बताया ।



मतदाताओं के नजरिये से देखा जाय तो इस याचिका में कहीं भी किसी प्रकार का कोई संशय हो , बहुत ही सटीक दलील दी है । निश्चित रूप से देश के हर नागरिक के लिए यह वरदान साबित होगी जो आज के वक़्त वोट देने के बाद अपने आप को ठगा, छला महसूस करता है । इस बदलाव से वह स्वच्छ एवं साफ सुथरे प्रत्याशी को चुन सकेगा । वह इसके जरिये प्रत्याशी के साथ साथ स्वयं का भी मूल्यांकन  कर सकेगा । इस माध्यम से उसमे विश्वसनीयता और आत्मविश्वास जागेगा जिसके जरिये वह राष्ट्र, राष्ट्रहित और राष्ट्र निर्माण के योग्य उम्मीदवार को चुन सकेगा । निश्चित ही मतपत्रों और EVM से चुनाव चिन्ह का हटना देश , देशहित और लोकहित के लिए एक क्रांतिकारी कदम होगा जो देश मे बदलाव के साथ साथ निश्चित ही देशभक्ति की भावना भी जगायेगा| 


आप भी इस संदर्भ में अपनी राय Comment Box में अवश्य दीजिये और गर्व महसूस कीजिये कि हम भारतीय है जो समय के साथ बदलाव लाना चाहते हैं ।

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