Indore Mayor Election 2021: “ स्वच्छता आन्दोलन में नंबर वन” के जगमगाते दिए तले लगातार घाटे के बजट का अँधेरा, क्या मेयर पद प्रत्याशी संजय शुक्ला ला पायेंगे एक नया सवेरा

 


चार साल पहले जब इंदौर की वर्तमान मेयर ने इंदौर की ओर से “सबसे स्वच्छ शहर” का अवार्ड उठाया, तब भावुक होकर उन्होंने उस लम्हे को भी याद किया जब उन्होंने शहर से ऐ टू जेड कंपनी द्वारा लगाईं गयी एक हज़ार कूड़ा पेटियों को हटाने के दुस्साहसिक निर्णय लिया था| उस वक़्त मालिनी जी ने शहर के हज़ारों नगर निगम कर्मियों और लाखो निवासियों में पूरा भरोसा दिखाया था| आज चार साल बाद ये कहने में कोई गुरेज़ नहीं होना चाहिए की “लीडिंग  बाई एक्साम्प्ल” की नेतृत्व शैली को अपना कर उन्होंने मध्य प्रदेश जैसे बीमारू राज्य के मुकुट में एक हीरा जड दिया है, जिसकी चमक आने वाले कई सालो तक इंदौर निवासियों को नंबर एक की लड़ाई में टिके रहने की प्रेरणा देती रहेगी|



शहर का स्वच्छता अभियान आया ऑटो-पायलट पर, मगर आगे क्या ?

चार साल स्वच्छता अभियान में भारत का प्रतिनिधित्व करके इंदौर की जनता ने साबित कर दिया है की यहाँ स्वच्छता अभियान ऑटो-पायलट mode में आ चुका है| ये सच है की शहर की सड़के ताजमहल के संगमरमरी फर्श की तरह चमचमा रही है, मगर नगर निगम की हालत बहादुर शाह ज़फर के खजाने जैसी हो गयी है| स्वच्छता अभियान को भारत पकिस्तान युद्ध की तरह लड़ा गया, जीत भी मिली मगर अब नगर निगम की अर्थव्यवस्था पर भी संकट आ सकता है, जिसका असर बाकी हिस्सों पर भी दिखाई दे सकता है| शहर का ट्रैफिक, यहाँ पर पर्यटन के लिए उपयुक्त infrastructure का ना होना, शहर के स्तर पर रोज़गार की कमी जैसे बहुत से ऐसे विभाग है जहाँ नगर निगम एक भागीदारी निभा सकता है| मगर इस वक्त तो नगर निगम नंबर वन की पदवी के शाश्वत जश्न में डूबा हुआ है|

क्या संजय शुक्ला के पास है कोई नया सिटी डेवलपमेंट प्लान ?

कहावत थी जैसा राजा वैसी प्रजा, मगर इंदौर के मामले में ये कहावत उलटी हो जाती है| आने वाले समय में इंदौर को चाहिए ऐसा मेयर जो “प्रजा में से निकला राजा” को चरितार्थ कर सके| इस बात को नकारा नहीं जा सकता की इंदौर शहर के वर्तमान सिटीस्केप को एक नए नज़रिए से देखने की ज़रूरत है| आज ज़रूरत है की शहर का infrastructure, रोज़गार, अध्यवसाय और और उद्योग के पहलू से भी विकसित किया जाए|

बीते दिनों मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने इंदौर को रोपवे की सौगात दी, इस रोप वे की कीमतों को लेकर अच्छे  खासे सवाल खड़े हो गए, साथ ही साथ एक बात और समझ आई की मेयर ऑफिस और जनता के बीच संवाद में कमी आई है| क्या कांग्रेस प्रत्याशी संजय शुक्ला के पास वो रोडमेप है, या फिर उन्हें भी उन प्रत्याशियों की गिनती में रखा जाए जिनके भाग से टिकट का छींका फूट गया है|  इंदौर शहर को विकास और शहरी व्यवस्था के नेक्स्ट लेवल पर ले जाने के लिए उनके पास क्या तैयारी है, ये प्लान उन्हें जल्दी से जल्दी प्रचारित या प्रसारित करने चाहिए अन्यथा, पुराने मेयर की उपलब्धियों के बोझ तले वो एक गुमनाम प्रत्याशी बने रह जायेंगे|


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