Indore Mayor Election 2021: गलियों कूचो पर कांग्रेस की पैनी नज़र, भाजपा नज़र आ रही है बेखबर, सीबीआई न्यूज़ और OWLC के संयुक्त तत्वाधान में करवाए गए सर्वे के दो चौंकाने वाले ट्रेंड

 



नगरीय निकाय के चुनाव हर मतदाता के दिल के सबसे करीब होते है, वो इसलिए क्यूंकि उन्हें अपने बीच में से एक चेहरा चुनना होता है| इस साल वसंत पंचमी पर खिलने वाले फूलों ने इंदौर की गलियों में बढ़ रहा चुनाव का तापमान भी महसूस किया है| ये तापमान बढ़ना शुरु है पिछले दिनों हुए कांग्रेस कार्यकर्ता सम्मेलन के बाद जहाँ मेयर पद के लिए संजय शुक्ला के नाम की औपचारिक घोषणा हुई|

सीबीआई न्यूज़ और OWLC के संयुक्त तत्वाधान में करवाए गए सर्वे से सामने आये दो चौंकाने वाले ट्रेंड....

पिछले दिनों हुए कार्यकर्ता सम्मेलन ने कांग्रेस के युवा सदस्यों में नयी ऊर्जा फूँक दी है| इन कार्यकर्ताओ का अनुशासन और जोश देखकर पार्टी के रणनीतिकार और उच्च पदाधिकारी  और टिकट बांटने के लिए गठित चयन समिति के सदस्य भी उत्साह से लबरेज़ हैं| डॉ विजय  लक्ष्मी साधो , सह प्रभारी विभा पटेल पूर्व केबिनेट मंत्री जीतू पटवारी, सज्जन सिंह वर्मा, शहर अध्यक्ष विनय बाकलीवाल जैसे दिग्गज नेता पार्टी कार्यकर्ताओ की एकजुटता को देख कर आशान्वित है की बीस सालो के लगातार शासन की वजह से फैली anti incumbency को भुनाने में उनकी ये जोशीली टीम ज़रूर कामयाब होगी|  

कांग्रेस का सीधा अटैक और भाजपा की Delay Tactics पर CBI News और OWLC की सर्वे रिपोर्ट

जब तुलनात्मक रूप में बीजेपी की तैयारियों का आंकलन किया जाए तो वार्ड के नए परिसीमन के बाद बदले हुए हालातो में कई संभावित प्रत्याशियों के सपने चकनाचूर हुए हैं और एक आंतरिक कलह की स्थिति बन गयी है| राजनेतिक विशेषज्ञ आंकलन कर रहे हैं की भाजपा द्वारा टिकट बांटने में की जा रही देरी के पीछे एक कारण ये भी है की उन्हें भीतरघात का डर है| यहाँ “क़ुरबानी देगा कौन” की परिस्थति का निर्माण हो चुका है और असंतुष्ट टिकटार्थी अन्दर ही अन्दर दीमक की तरह बीजेपी के लॉयल वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं|  

 


हाल ही में OWLC और CBI न्यूज़ की टीम ने इंदौर की गलियों में एक “ Qualitative & Participative” survey किया, इस सर्वे के परिणाम चौंकाने वाले थे| सबसे पहली बात ये की, शहर के लोग हैरान है की हमेशा बूथ लेवल पर बहुत जल्दी कमान संभाल लेने वाली बीजेपी के विलम्ब को अंतर्कलह की दृष्टि से देखा जा रहा है| कांग्रेस की और उठाये गए Timely और Prompt कदमो की वजह से शहर में कांग्रेस के प्रति विश्वास का माहौल बन रहा है|



भाजपा का कम सम्पर्क बनाम कांग्रेस का सघन जन संपर्क

शहर की गलियों में नज़र आने लगा है की टीम संजय शुक्ला, अभी से वार्ड स्तर पर सघन जनसंपर्क कर रही है, लोगो की समस्याए सुनी जा रही है और उन पर विशद चर्चा भी हो रही है, माना जा रहा है की इस जन संपर्क का असर संजय शुक्ला के चुनावी घोषणापत्र में नज़र आएगा और अंधेरो कोनो की भी बात होगी जो स्वच्छता अभियान की आतिशबाज़ी की चमक में धुन्धलाये हुए नेताओ और अधिकारियो को नज़र नहीं आ रहे हैं|

गली कूचो की समस्याओं का बारीक आंकलन और भी कई नेता कर रहे हैं जैसे की वार्ड नंबर 35 के राजा वार्ड क्र 35 से राजा टोनेरे , वार्ड क्र 22 से राजू भदौरिया, वार्ड क्र 29 से मनोज जाधव और वार्ड क्र 56 से चंदू कुंजिर| देखा जाए तो ये एक तरह का इंटीग्रेशन होगा जहाँ, बॉटम अप का मैनेजमेंट मॉडल अपनाते हुए इंदौर की गलियों को एक अंतरराष्ट्रीय शहर के साथ तुलनात्मक रूप से पढ़ा जायेगा|

नौजवान मतदाता को गूगल ज्ञान है भाता

निर्वाचन आयोग ने पिछले सप्ताह युवा मतदाताओ को मतदाता सूची में नाम जुडवाने का मौका दिया है| कांग्रेस की तैयारिया देख कर साफ़ तौर पर समझा जा सकता है की इस बार वो अपने प्रत्याशी का चयन करते समय उनके एजुकेशनल बैकग्राउंड, सोशल सर्विस ( समाज सेवा) प्रोफाइल और डिजिटल ( सोशल मीडिया) प्रोफाइल पर भी गौर फरमायेंगी| परिसीमन के वक्त महिला वार्ड घोषित हुए कुछ वार्ड्स जैसे की वार्ड 70 और वार्ड 23 के अग्रणी दावेदारों पर अगर नज़र डाली जाए तो ऊपर दिया गया वक्तव्य सही प्रतीत होता है| वार्ड 70 की ऋचा शर्मा टोंक को हम नयी पीढ़ी के ओजस्वी कार्यकर्ताओ को प्रोटोटाइप भी मान सकते हैं| ऋचा शर्मा टोंक और पूजा अजय चोकसे कुछ ऐसे चेहरे हैं जो पिछले कई वर्षो से लगातार सक्रिय समाजसेवा में जुड़े हैं और तरह तरह के इनोवेटिव आर्थिक, शैक्षणिक और सामजिक आयोजन करके लोगो के दिलो में जगह बना चुके हैं|

कहीं अपने ही वज़न तले चित ना हो जाए हैवीवेट पहलवान

इस समय कांग्रेस एक ऐसी सेना की तरह आगे बढ़ रही है जिसका सेनापति सामने से आकर नेतृत्व कर रहा है| शीर्ष नेतृत्व को चाहिए वो जल्द से जल्द बाकी प्रत्याशियों के नाम घोषित करे और उन्हें अपनी जड़े जमाने का पूरा मौका दें|

दूसरी ओर बीजेपी उस हैवीवेट पहलवान की तरह हो गयी जिससे अपने ही वज़नदार नेताओ का ही वज़न नहीं संभल रहा| माननीय शिवराज और महाराज जी ने जोड़ तोड़ करके सरकार तो बना ली है मगर, अब पदों की हिस्सेदारी और पहले से मोजूद incumbency  के चलते कोई भी प्रत्याशियों का जल्दी चयन करना उनके लिए मुसीबत का सबब बन सकता है| उनके लिए Delaying Tactics ही बेस्ट हैं क्यूंकि ऐसा करके वो भीतरघात करने को आतुर लोगो के प्रभाव को कम कर सकते हैं|



 

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