Whistle Blower speaks: झगड़ा झूठा, कब्ज़ा सच्चा, नजूल की ज़मीन को बनाया फ़िज़ूल की ज़मीन और धीरे से “ भ्रष्ट अधिकारी सहायता कोष” में सरका दिया



इंदौर शहर के राजनेतिक हर्फो में अपनी सटीक और सधी हुई वाणी के लिए प्रसिद्ध कांग्रेस कमेटी द्वारा प्रवक्ता पद पर सुशोभित  अधिवक्ता प्रमोद कुमार द्विवेदी ने अपने व्यंगात्मक अंदाज़ में उन सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ बिगुल बजा दिया जो सरकारी दांव पेंच भिड़ा कर सुनियोजित तरीके से सरकारी ज़मीन पर कब्ज़ा कर रहे थे |

झगड़ा झूठा कब्ज़ा सच्चा  के बीच झूलता ग्राम सिरपुर  का विवादित मामला 

                उनके अनुसार  ग्राम सिरपूर के सर्वे नं. 156/1 कूल रकबा 4.51 एकड नजूल की भूमि सन् 28.08.2008 में तीस वर्ष याने 27.08.2038 तक के लिये लीज पर दी। सन् 2001 में आबंटन हुआ, पुलिस विभाग ने आपति ली तो आबंटन कांग्रेस सरकार में रूका पर भाजपा सरकार आई खेल हुआ परंतू आबंटन के आधार पर ही 29.09.2001 को इस काँलोनी का TNC मेप स्वीकृत किया TNC अधिकारीयो ने उस आबंटन में व 2008 की लीज में बारूद घर का उल्लैख नहीं इस बारूद घर पर खाली जमीन बता बगीचा TNC ने जनशक्ति गृह निर्माण सोसायटी से मिलकर मानचित्र स्वीकृत किय।

द्विवेदी ने  कुछ बड़े संगीन सवाल उठाये, जिस का उत्तर सरकार और सम्बंधित विभाग को तत्परता से देना चाहिए, यदि आपके पास भी इस विषय में कोई जानकारी है तो आप हमारे माध्यम से द्विवेदी जी से संपर्क कर सकते हैं|

प्रश्न १ :जब जमीन नजूल की थी, नजूल ने लीज जमीन की थी तो नजूल अधिकारियों ने जिला कलेक्टर, अनुविभागीय अधिकारियो ने बारूद घर का कब्जा कैसे दिया ?

प्रश्न २ :बिना नामान्तरण इसी जमीन का डायवर्सन कैसे किया, डायवर्सन खाली भूमि का होता है तो यह भूमि खाली थी ही नहीं तो डायवर्सन कैसे ?

प्रश्न ३:  बिना नामान्तरण डायवर्सन कैसे, आज भी जनशक्ति गृह निर्माण संस्था का नाम नही तो ? लीज खाली जमीन की होती है तो बारूद घर का विक्रय पत्र कहाँ ?

प्रश्न ४:  नगर निगम उपायुक्त अरूण शर्मा ने बारूद घर कैसे तुड़वाया ?

प्रश्न ५ :बिना विकास भवन अनुज्ञा कैसे जारि। अभी भी विकास नहीं तो नगर निगम काँलोनी सेल, भवन अनुज्ञा शाखा आयुक्त की मेहरबानी क्यों?

अधिवक्ता प्रमोद कुमार द्विवेदी ने ये सवाल प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह जी से सीधे सीधे किये हैं| मगर इस बारे में मेरी राय एक दम स्पष्ट है| बेहतर ये होगा की ये सवाल सही पेपर वर्क के साथ अधिकारियो तक पहुंचे, सिटीजन चार्टर के अंतर्गत इनके जवाबो का इंतज़ार हो, और अगर जवाब नहीं मिलते तो फिर मुख्यमन्त्री जी इस मामले का संज्ञान लें और और न्याय करके, प्रमोद जी जैसे सजग “चैंपियन ऑफ़ जस्टिस” का विश्वास विधान पालिका और कार्यपालिका में फिर से स्थापित करवाए|



अगर प्रमोद जी के दावे सही हैं, तो आज ये मामला एक “सच्चा झगडा है” मगर जैसे जैसे समय बीतता जाएगा, “झगड़ा झूठा” और कब्ज़ा सच्चा होता जाएगा| भू-माफियाओ के खिलाफ शिवराज जी के आक्रामक तेवरों ने लोगो के मन में अतिक्रमण मुक्त मध्य प्रदेश की उम्मीद जगाई है| इस मामले का निस्तारण उनके लिए एक सुअवसर है जब वो अपनी न्यायप्रिय प्रणाली की मदद से विपक्षियो और आलोचकों का मूंह बंद कर सकते हैं| 

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