Morena Hooch Tragedy: नशे की बस्ती में अंगूर की बेटी को सुनाया तलाक़ का फरमान



मध्य प्रदेश में शराब की ऑनलाइन बिक्री हो या ना हो, इसको लेकर कमलनाथ जी ने अपने चिर परिचित अंदाज़ में सरकार पर फिर चुटकी कसी, इधर शिवराज सिंह जी ने जिला कलेक्टरो की मीटिंग में revenue बढाने के तरीको के बारे में पूछा| एक बात तो समझ आती है शराब चीज़ ही ऐसी है जो ना छोड़ी जाती है, ना पकड़ी जाती है| मधुशाला और राजस्व के बीच जो नाता है उसकी गहराई आज दैनिक भास्कर में प्रकाशित एक स्टिंग ऑपरेशन में नज़र आई जहाँ पता चला की इतनी कड़ाई के बाद भी पंद्रह जगहों पर कल भी कंट्रीमेड लिकर उपलब्ध थी|



एक तरफ जहाँ मध्य प्रदेश सरकार, शराब से छन कर आने वाले राजस्व को बढाने की फिराक में हैं वहीँ नयी पीढ़ी के युवा समाज सेवक घनी बस्तियों में जाकर शराब के खिलाफ एक इको-सिस्टम बनाने की कोशिश कर रहे हैं| ऐसे ही एक प्रयास का हिस्सा बनने का सौभाग्य मुझे भी प्राप्त हुआ, जिसने मेरे अन्दर के उस भाव को और भी प्रबल किया जो कहता है की “शासकीय और सामाजिक संयुक्त प्रयासों से ही नशा मुक्ति अभियान की सफलता संभव|”

 मध्यप्रदेश बैरवा जागृति मंच और मध्य प्रदेश बेरवा समाज के प्रथम देहदानी -स्वर्गीय सतीश करोले समिति के संयुक्त तत्वधान में आयोजित इस नशा मुक्ति आन्दोलन में, जाग्रति मंच के अध्यक्ष advocate लीलम कुमार डोहरिया और मैंने इंदौर की कई छोटी बस्तियों में जाकर, शराब के आदी लोगो से मुलाक़ात की और उन्हें कौंसिल किया ताकि वो शराब छोड़ सके|



शराबी से शराब छुड़वाना कोई आसान काम नहीं है, यहाँ कोई जादू की छड़ी काम नहीं करती, मतलब ऐसा नहीं होता की आपने पम्फलेट पकडाया, शराबी ने पम्फलेट पढ़ा और “बिफोर & आफ्टर” की तरह शराबी शराब मुक्त हो गया| ये एक लम्बी लड़ाई है, जिसे सरकार और सामजिक संगठनों को साथ में मिलकर लड़ना है| महात्मा गाँधी के प्रयाण दिवस पर किया गया ये प्रयास शुरुआत है उस पदयात्रा का जो हमें बार बार इन बस्तियों में ले जायेगी और शराबियों का मनोविज्ञान समझने में मदद करेगी|



बहुत जल्द हम फिर इन्ही बस्तियों में जायेंगे और शराब और शराबियो के बीच तलाक़ की औपचरिकता निभाएंगे, अगर आप भी इस मिशन का हिस्सा बनना चाहते हैं तो हमें इन नंबर्स पर कांटेक्ट कर सकते हैं|

अनिकेत कारोले  77708 58592

एडवोकेट लीलम  कुमार डोरिया 992 666 7956

 

 

 

 

 


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