Marketing in Post-epidemic India : टाइल्स मार्किट में बिकने के लिए ज़रूरी है डिजिटल और इंटरनेशनल कलेवर, कुछ ऐसा हो चला है मार्किट का तेवर

 






कोरोना आक्रमण के बाद दुनिया में सिर्फ तीन तरह की अर्थव्यवस्थाये रह गयी है| वो देश जिन पर कोरोना का असर कम हुआ है, वो देश जहाँ लॉकडाउन के बाद भी मशीने बंद हैं क्यूंकि कोरोना की वापसी डर है|  इन देशो मैं  सोशल distancing ने प्रोडक्शन की रफ़्तार धीमी कर दी है| तीसरी category में वो देश हैं जहाँ herd immunity अपने पाँव फैला चुकी है और ये देश तेज़ी से न्यू नार्मल का पालन करते हुए अर्थव्यस्था की दौड़ में वापस आ चुके हैं| इंडियन इकॉनमी तेज़ी से न्यू नार्मल का पालन करते हुए पटरी पर आ रही है| कम से कम इंडिया के टाइल्स मार्किट को देख कर तो ऐसा कहा ही जा सकता है|

इटली और चीन का loss, भारत के लिए  बना सुअवसर

आने वाले दो सालो में International Business scenario में काफी तेज़ी से बदलाव् आयेंगे| इंडिया के टाइल निर्माता अगर prudently अपने मार्किट प्लान बनाये और अपने प्रोजेक्शन को दुरुस्त कर लें तो Small और Mid-Size निर्माता भी overseas market में अपने लिए जगह तलाश सकते हैं और मोटा मुनाफा कमा सकते हैं|

हुआ कुछ यूँ है की टाइल्स के प्रमुख निर्माता देश इटली में प्रोडक्शन की फैसिलिटी अभी पटरी पर वापस नहीं आई है| कोरोना वायरस की वजह से बहुत सारे देशो ने चाइना से अपने कारोबारी रिश्ते समेटने का मन बनाया हुआ है| ऐसी परिस्थिति में PESTLE एनालिसिस पूरी तरह से चाइना के खिलाफ है क्यूंकि पोलिटिकल फैक्टर की वजह से चाइना की बेहतर टाइल्स भी बहुत सारे ओवरसीज देश नहीं खरीदना चाहते है|

गुजरात और मोरबी के टाइल्स manufacturers इस समय ओवरसीज मार्किट में आराम से अपने पाँव जमा सकते है बशर्ते की उनका मार्केटिंग प्रोजेक्शन digitally enabled और at par with international standards हो|



गूगल नहीं पहचानता तो कोई आपको नहीं जानता, फर्स्ट इम्प्रैशन से शोर्ट-लिस्टिंग का सफ़र समझिये

कभी आपने सोचा है ओवरसीज में बैठा हुआ क्लाइंट, जब इंडियन टाइल्स निर्माताओ की तलाश करता है तो फर्स्ट इम्प्रैशन के तौर पर वो उन्हें आर्गनाइज्ड या अनआर्गनाइज्ड सेक्टर प्लेयर के तौर पर देखता है| भले ही आप असली दुनिया में जैसे भी हों, लेकिन अगर आप डिजिटल दुनिया में व्यवस्थित हैं तो फिर आपकी गिनती ऑटोमेटिकली आर्गनाइज्ड सेक्टर प्लेयर्स में होने लगती है| आपकी वेबसाइट, लिंक्ड-इन पेज, यू-ट्यूब पर आपकी वीडियोस, हर चीज़ की बारीकी से जांच होती है| अगर आप यहाँ अच्छा इम्प्रैशन नहीं छोड़ते तो शायद वो आपको शोर्ट-लिस्ट ही ना करे| इस कंडीशन में अगर कोई मिडिलमेन भी आपको प्रमोट कर रहा हो तब भी शायद बात ना बने, या फिर वो क्लाइंट आपके बारे में “low end resource (सस्ते में काम करने वाला)जैसी इमेज बना ले| इसलिए अपनी वेबसाइट को अपने फ्रंट ऑफिस की तरह समझिये और डिजिटल मीडिया प्रोफाइल आज की तारीख में आपके लिए विज्ञापन से कम नहीं है|

थर्ड पार्टी प्रमोशन भी ज़रूरी है

गूगल आपको किस तरह प्रोजेक्ट करता है, इन्टरनेट मीडिया पर business channels आपके बारे में क्या राय रखते हैं| क्रॉस प्रमोशन चेनल आपको किस तरह प्रोजेक्ट करते हैं, इन सब बातो का भी काफी असर पड़ता है| अगर आप यहाँ पिछड़ते है तो फिर याद रखिये, पोस्ट कोरोना वर्ल्ड और न्यू नार्मल के अन्दर आपको business करने में काफी दिक्कतें हो सकती है| याद रखिये, अहमदाबाद और मुंबई की प्राइम लोकेशन में आपके ऑफिस होने से उतना फर्क नहीं पड़ता, जितना फर्क पड़ता है, एक अच्छी वेबसाइट पर आपके बारे में लिखे गए write up से पड़ सकता है| याद रखिये, डिजिटल मीडियम पर प्रेसेंस होना बेहद ज़रूरी है, क्यूंकि हर ब्लॉग हर न्यूज़ पर एक टाइम स्टाम्प होता है और ओवरसीज में बैठे क्लाइंट्स इस टाइम स्टाम्प को ऑथेंटिकेशन की मोहर मानते हैं| बाकी सब कुछ रातोरात खड़ा किया जा सकता है, मगर डिजिटल एम्पायर खड़ा करने के लिए रोज़ कुछ ना कुछ नया करना ज़रूरी है|

मोरल ऑफ़ दी स्टोरी एक दम साफ़ है, अगर आप टाइल्स निर्माता हैं और चाइना व इटली को पछाड़ कर इंटरनेशनल business हासिल करना चाहते हैं तो अपने डिजिटल पोर्टफोलियो पर भी फोकस कीजिए, टाइम और मनी इन्वेस्ट कीजिये और एक ऐसा डिजिटल एम्पायर बनाइये जो इंटरनेशनल प्लेयर्स के सामने आपका फर्स्ट इम्प्रैशन बन सके|



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