फालतू खबरों के बीच दम तोडती कोरोना वैक्सीन की जानकारी, मीडिया कब निभाएगा ज़िम्मेदारी

 



पहले थोड़ी फालतू खबरों से शुरू करते हैं, “ फलां फलां दिन से शुरू होगी वैक्सीन महाक्रान्ति”, “गो कोरोना गो, के बाद नो कोरोना नो|” फलां राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने वोलंटियर बन कर वैक्सीन लगवाई ,फोटो खिंचवाई”| समाचार पत्र , न्यूज़ चैनल, स्वर्गीय सुशांत सिंह राजपूत की रहस्यमय कहानी कहने को टर्र टर्र बोली मेंढक मीडिया, सभी कोरोना वैक्सीन को लेकर तरह तरह की इंटरटैनिंग खबरे दिखा रहे हैं|

कोरोना वैक्सीन के बारे में काम की खबर   

एम्स के डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने वैक्सीन के बारे में जो बयान दिया है उसकी सबसे ज़रूरी बात ये है की भारत सरकार एक एप्लीकेशन बनाने पर विचार कर रही है जहाँ कोरोना वैक्सीन के साइड इफ़ेक्ट नज़र आने पर संपर्क किया जा सकता है| दूसरी ज़रूरी खबर ये है की कांग्रेस पार्टी शासित तीन राज्यों ने केंद्र द्वारा दी रही कोरोना वैक्सीन और टीकाकरण में पूरा भरोसा जताया है तथा सहयोग का वादा भी किया है|



खबरों के आंकलन से समझ आएगा मीडिया का चालचलन

डॉ गुलेरिया ने कहा की साइड इफेक्ट्स नज़र आने पर हम एप्लीकेशन पर संपर्क कर सकते हैं| मगर समस्या ये है की कोरोना वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स क्या हो सकते हैं ये तो किसी को पता ही नहीं है| मीडिया के किसी भी बादशाह ने अभी तक जन मानस को ये जानकारी देने की ज़रूरत ही नहीं समझी है| कोरोना वैक्सीन को लोहड़ी के सेलिब्रेशन से जोड़ने में व्यस्त है या फिर इस्लामिक शरीयत में कोरोना वैक्सीन के ingredients किस तरह बखाने गए हैं इस पर चर्चा हो रही है| कोई भी चैनल, सरकारी माध्यम या फिर वैक्सीन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक, वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स के बारे में चर्चा करने को तैयार ही नहीं है|



कोरोना मौतों का आंकड़ा उन मौतों की तरफ भी इशारा करता है जो  confidence building measures की कमी से हुई थी

ये बात हमसे छिपी नहीं है की स्ट्रिक्ट covid प्रोटोकॉल होने की वजह से बहुत सारे care giver या यूँ कहें की मरीजों के attendant कोरोना वार्ड में अपने मरीजों को छोड़ने से डरते रहे और इलाज़ की कमी से कई मरीजों की असमय मौत हो गयी| कोरोना के साथ सबसे बड़ी चुनोती ये थी की इस बीमारी की वजह से मरीज़ अपने attendent से दूर हो जाता था और ये islotation,  या तो उसे Agnoy ( मृत्यु तुल्य कष्ट) देता था या फिर मृत्यु ही दे देता था| अगले कुछ महीनो में जिन लोगो को कोरोना वैक्सीन लगेगी उनके साथ भी यही कंडीशन लागू होगी, उनके स्वास्थ्य लाभ के लिए care givers एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगे| मैं स्वास्थ्य मंत्री जी ( देश और राज्य included) का ध्यान इस तथ्य की और लाना चाहूँगा की टीकाकरण कार्यक्रम के समय और उससे पहले व्यापक पैमाने पर ऐसे प्रोग्राम चलाये जाने चाहिए जहाँ केयर गिवर या मरीज़ के attendent को टीके के साइड इफेक्ट्स के बारे में प्रॉपर एजुकेशन मिले| कोरोना वैक्सीन तो एक संजीदा मामला है, ये प्रोटोकॉल तो हर छोटी बड़ी दवाई पर लागू होता है जिसके साइड इफेक्ट्स हैं|



तमाशे शामिल होने को  तैयार, मगर असली काम की टाली बेगार

मगर क्या इन care givers को कोरोना वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स ठीक से मालूम है? जवाब है नहीं| सच तो ये है की भारत बायोटेक समेत सभी stake-holders, या तो साइड इफेक्ट्स के बारे में बोल नहीं रहे हैं, और अगर बोल भी रहे हैं तो उन जगहों पर बोल रहे है जिनकी पहुँच आम आदमी तक नहीं है| “टी आर पी वार में शास्वत व्यस्त” भारत देश की ब्रेकिंग न्यूज़ मीडिया में इस सवाल के जवाब या तो दिखाए नहीं गए हैं, अगर दिखाए भी गए हैं तो वो अभी तक आम आदमी की पहुँच के बाहर है|



यहाँ पर एक तथ्य का खुलासा करना बेहद ज़रूरी है, कोरोना से सम्बंधित कोई भी जानकारी प्रसारित करने का हक सिर्फ और सिर्फ रेस्पोंसीबल, appointed या फिर delegated एजेंसीज को ही है| विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइन्स का पालन करते हुए गूगल और बाकी सर्च इंजन ज़िम्मेदारी से काम कर रहे हैं| covid के बारे में कोई भी तथ्यपरक जानकारी सिर्फ ज़िम्मेदार संगठनों की तरफ से आये, इस प्रयास में पिछले एक साल से सफल भी रहे हैं| मगर अब कहानी बदल गयी है| इस समय दुनिया में कई तरह की कोरोना वैक्सीन आ गयी है| इस छोटे दायरे की वजह से लोकल मीडिया और नेशनल मीडिया की ये ज़िम्मेदारी बन जाती है की वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स के बारे में तथ्यपरक जानकारी सभी तक पहुंचाई जाए|

एक ज़िम्मेदार पत्रकार होने के नाते मैं कहना चाहता हूँ की कोरोना वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स के बारे में मेरे पास कोई भी तथ्यपरक, विश्वसनीय या फिर सरकार द्वारा उपलब्ध करवाई गयी कोई भी जानकारी नहीं है| ये बात में अपने पाठको के बारे में कह सकता हूँ जिन्हें जानकारी के सही स्त्रोतों के बारे में पता नहीं है|

सुनो पार्टी कार्यकर्ताओ “जूझता है भारत”, सुनो अर्नब “पूछता है भारत”

मोरेना हो या मुरादाबाद हो, पोरसा हो या पोहरी हो, भोपाल हो या भावनगर हो, सभी जगहों की मीडिया और स्वास्थ्य कर्मियों से मैं करबद्ध निवेदन करता हूँ की वो कोरोना वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स के बारे छाये इस अँधेरे को दूर करने के लिए कारगर कदम उठाये| साथ ही साथ चम्बल संभाग और मालवा में बसे हुए हजारो लाखो सत्ताधारी पार्टी एवं विपक्षी पार्टी के सदस्यों से अपील करता हूँ की जिस तरह वो चुनाव में एक्टिव हो जाते हैं उसी तरह पार्टी का झंडा लेकर बाहर निकले और इक्कीसवी सदी की इस वैक्सीन महाक्रान्ति में कोरोना सेनानी का दर्ज़ा प्राप्त करे|

विचारो के ओजस्वी क्रन्तिकारी श्री अर्नब गोस्वामी जी से मैं कहना चाहता हूँ, “सुनो अर्नब पूछता है भारत, भारत पूछता है की भारत में प्रतिपादित की जाने वाली कोरोना वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स क्या है? अगर कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं है तो भी हमें बताइये, और अगर हैं तो इस बार अपने पैनल में कुछ क्वालिफाइड डॉक्टर्स को बुलाइए जो इस बारे में रौशनी डाल सके|

एक छोटी सी अपील प्रधानमंत्री जी और सांसदों से भी है, हमेशा की तरह  8 PM के वक्त मुझे उनके भाषण का इंतज़ार है और साथ ही मेरी विनम्र विनती है की इस बार “मन की बात” में कोरोना वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स के बारे में कुछ तथ्य शामिल हो तो जनता को सही राह मिल जायेगी|



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