मुरेना विज़न २०२१: मामा जी के नाम पर ट्रैफिक सिग्नल दे दो महाराज

 

कभी कभी “Degree of Comparison” यानी तुलनात्मक तराज़ू में वाट बदल कर भी नगर निगमों और शहरो  को तोल लेना चाहिए| आज कल तोलने का सबसे कॉमन तराज़ू है भाजपा versus कांग्रेस, यानी मध्य प्रदेश में भा ज पा ने कितना विकास करवाया और कांग्रेस ने कितना| अब यही तुलनात्मक पैमाना या तराजू दो ऐसी जगहों पर लागू करते हैं जहाँ पूरी तरह से भाजपा का वर्चस्व है| ये दो शहर हैं मुरेना और इंदौर|

क्यूंकि मध्य प्रदेश भी कभी बीमारू राज्यों में गिना जाता था|

याद करिए, तकरीबन दो दशक पहले जब शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश की कमान संभाली थी तब मध्य प्रदेश की गिनती बीमारू राज्यों में होती थी| इन्वेस्टर्स यहाँ पैसा लगाने को तैयार नहीं थे| पठारों के बीच भोपाल उग रहा था, इंदौर अपने ऊपर लगी मिनी मुंबई छाप मिटाने में व्यस्त था| मुरेना ने इस समय स्वर्गीय माधव राव सिंधिया जी के प्रयासों से कुछ बड़ी गाडियों का रुकना देखा था|

मुखिया मुख सो चाहिए की तर्ज़ पर शिवराज सिंह जी ने पूरे प्रदेश के समग्र विकास की कमान संभाली, आज इसी बीमारू राज्य के पांच शहर स्मार्ट सिटी की दौड़ मैं हैं और इंदौर तो  स्वच्छता के मामले में भारत का सिरमौर बना हुआ है|



आज दुनिया का सबसे बड़ा ओपन एयर भेंस तबेला बनाम भारत का नंबर वन  स्वच्छ शहर

मगर मुरेना पीछे क्यूँ रह गया? चलिए, अब साल के पहले हफ्ते में मुरेना और इंदौर की उपलब्धियों को तोलते हैं| साल के पहले हफ्ते में मुरेना नगर निगम को सडको पर बंधी गाय और भेंसो को हटाने के मामले में बुरी तरह से मूंह की खानी पड़ी| भेंसो से गली मुक्त कराने गए शहर के आला अधिकारियों को लोगो ने “ननकू की बकरी” समझ के हांक दिया|

इसी हफ्ते में खानापूर्ती भी हुई, चार साल पुराने स्वच्छता अभियान का ककहरा बखानते कुछ पोस्टर्स यहाँ वहां नज़र आये| इधर  कोरोना बैरियर हटने के बाद शहर का ट्रैफिक एक बार फिर बेकाबू हो गया| नितिन गडकरी जी के सपनो की हत्या करते, अंडर एज bikers और स्कूटी चालको ने वो हालात बना दिए जहाँ पैदल चलने वाले अब हेलमेट लगाने के बारे में सोचने लगे हैं| इ-रिक्शा चालको और आर टी ओ की विशेष अनुकम्पा से ड्राइविंग का प्रिविलेज पाए  “नौसिखिया लक्ज़री कार ड्राइवर्स ने “ ऐसे ट्रैफिक जाम लगाये की सूरज और चाँद तक मुरेना में धीमे धीमे उगने और ढलने लगे|



रेंगने में असमर्थ मुरेना और उडन खटोले के लिए तैयार इंदौर

दूसरी तरफ इसी पहले हफ्ते मैं इंदौर के कलेक्टर के नेतृत्व में नगर निगम द्वारा तैयार किया गया विज़न डॉक्यूमेंट मुख्यमंत्री के शिवराज सिंह जी के सम्मुख एक पॉवरपॉइंट प्रेजेंटेशन की शक्ल में प्रस्तुत किया गया| मामा जी ने कई योजनाओ को ठीक से परखा और साल के  पहले हफ्ते में इंदौर को रोपवे की सौगात मिल गयी| अब सोचिये, एक ही राज्य, एक ही मुख्यमंत्री एक ही पार्टी एक ही नीतिया, मगर फिर भी मुरेना में घुटनों के बल रेंगना भी मुश्किल है, दूसरी तरफ इंदौर निवासी अब रोपवे की मदद से सडक के ऊपर उड़ने की  तैयारी कर रहे हैं|





क्या इस साल मुरेना वासी शहर में ट्रैफिक सिग्नल की उम्मीद रख सकते हैं?

पिछले तीन सालो से मुरेनावासी ट्रैफिक जाम के बीच रेंग रहे हैं, हर बार ये लोग बड़ी हसरत से उन ट्रैफिक सिग्नल पोस्ट को देखते हैं जो मुरेना नगर पालिका के नगर निगम बनने की गवाही देती हैं| कई सरकारी अधिकारी आये और चले गए मगर इन ट्रैफिक सिग्नल्स को कोई माई का लाल चालू नहीं करवा पाया| क्या २०२१ में शिवराज जी और सिंधिया जी के मिले जुले प्रताप से मुरेनावासी इन ट्रैफिक सिग्नल्स की प्राण प्रतिष्ठा होती हुई देख पायेंगे???

 


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2 Comments

  1. Morena sheher mai sab neta so rahe hai hamare bhai sujeet unko jagane ki koshish kar rahe hai

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  2. उत्साहवर्धन के लिए तहे दिल से शुक्रिया मित्र, यदि आप इन शब्दों का मर्म समझ पाए तो विश्वास कीजिये, आप ही आने वाले समय में मुरेना शहर के नेता हैं| जो सो रहे हैं उन्हें सेवा-निवृति का अवसर प्रदान कीजिये और इस तरह के मंचो से और जागरूकता से जुड़ कर इन विचारो को बाकी लोगो तक भी पहुंचाइये ताकि आपकी विचारधारा को भी नए समर्थक मिले....

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