मोरेना विज़न २०२१: क्या करेगा अकेला नूराबाद जब बाकी सब है पूरी तरह बर्बाद




नए साल के पहले दिन नूराबाद के पर्यटन विकास के बारे में पढ़ कर पहले में मुस्कुराया और बाद में ये मुस्कुराहट तब्दील हो गयी एक व्यंग भरी मुस्कुराहट में| मास्टर्स इन टूरिज्म मैनेजमेंट के विद्यार्थी की हैसियत से सन 2002 में चम्बल रीजन के लिए” टूरिज्म इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट का प्रोजेक्ट” डेवलप करते हुए निराशा हाथ लगी थी| ऐसा कोई कारण ही नहीं मिला जिसकी वजह से मोरेना में एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटक को एक रात भी रोका जा सके| ना तो यहाँ अच्छे होटल्स थे, ना ही यहाँ अच्छी नाईट लाइफ थी और सबसे ज़रूरी बात शहर का माहौल, अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों और बड़े शहरो से आये घरेलू पर्यटकों के लिए बिलकुल भी अच्छा नहीं था| उसी प्रोजेक्ट में “ पर्यटन की भविष्यगत संभावनाओ के मद्देनज़र सुझाव्” का शीर्षक लिखते वक्त मैंने उम्मीद जताई थी की सन 2020 में हालात सुधर चुके होंगे और शायद मोरेना पर्यटन के मानचित्र पर स्थान बनाने में कामयाब होगा| मगर अफ़सोस ऐसा कुछ भी नहीं हुआ|



Tourism is a collective activity

अठारह वर्ष बाद पर्यटन विशेषज्ञ और ट्रेवल ब्लॉग राइटर की हैसियत से मुझे बड़े अफ़सोस के साथ कहना पड़ता है की आज भी मोरेना में टूरिज्म के विकास के लिए कोई संभावनाए नहीं है| पिछले कुछ वर्षो में यहाँ एक म्यूजियम बनाया ज़रूर गया, मगर वो अब राजनेतिक पार्टियों  और लोकल waanaabe  नेताओ के कैंडल दहन कार्यक्रमों के काम आता है| पशुपति नाथ जी के मेले में जो सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए शायद उनमे एंटरटेनमेंट वैल्यू की कमी थी वर्ना कोई कार्यक्रम तो याद रहता| कुछ तो ऐसा होता की आस पास के शहरो से लोग खिंचे चले आते| मुरेना की गज़क आज इंदौर, भोपाल और ग्वालियर जैसे शहरो में मध्य प्रदेश की शान बढ़ा रही है, मगर पिछले अठारह सालो में मुरेना के प्लानर शहर में एक गज़क हब भी विकसित नहीं कर पाए हैं|


बीहड़ दर्शन आज भी दूर की कौड़ी है

 टूरिज्म विकास के नाम पर टुकडो में कई प्रयास हुए, मगर कोई भी प्रयास सुनियोजित ( इंटीग्रेटेड) नहीं था| सच तो ये है की अगर राष्ट्रीय स्तर का कोई टूर पैकेज प्लानर, चम्बल सफारी या “ बीहड़ दर्शन” जैसा कोई पैकेज बनाना भी चाहे तो ये संभव नहीं है, लंच और रिफ्रेशमेंट के लिए जिस स्तर के restaurents की ज़रूरत है वैसा एक भी restaurent मोरेना में नहीं है| मान लीजिये, अगर मितावली, शनिचरा और ककनमठ को जोड़ कर अगर एक “One Day Excursion” पैकेज बनाया भी जाए तो अंत में पता लगता है की दो जगहों पर साइट्स के आलावा मनोरंजन का कोई भी साधन उपलब्ध नहीं है| यहाँ तक अंतरराष्ट्रीय पर्यटक शायद यहाँ के टॉयलेट्स से भी नाखुश हो जाए| उस पर तुर्रा ये है ये सब डे डेस्टिनेशन हैं, यानी शाम होने से पहले आपको ये डेस्टिनेशन छोड़ना होगा क्यूंकि यहाँ इवनिंग प्लान ही नहीं की गयी है|


रैंडम विकास, विकास नहीं पब्लिक मनी की बर्बादी है

यहाँ एक बात समझने की ज़रूरत है, रैंडम विकास से काम नहीं चलेगा| नूराबाद की नदी में नाव डाल देने से पर्यटन का विकास नहीं होगा, विकास होगा पर्यटन मानचित्र तैयार करने से, नए आकर्षण पैदा करने से काम नहीं चलेगा, जो थाती हमारे पास है उसे इंटीग्रेटेड तरीके से एक  पर्यटन पटल पर लाने की आवश्कयता है| पर्यटन मानचित्र पर आने के लिए हर शहर को एक थीम की ज़रूरत होती है| मैं शहर के tourism planners से पूछना चाहता हूँ की इस शहर के पर्यटन विकास की थीम क्या है और नूराबाद में नावे डाल कर उसे किस तरह एन्हांस किया जा रहा है|



क्या मुरेना बाकी विश्व से पूरी तरह कनेक्टेड है?

किसी भी पर्यटन स्थल के विकास में सबसे ज़रूरी होती है कनेक्टिविटी, बड़े अफ़सोस के साथ कहना पड़ता है की मुरेना आज भी ग्वालियर या धौलपुर के आलावा किसी भी जिले से सीधी तरह कनेक्टेड नहीं है| अगर कनेक्टेड है भी तो कंडीशनल कनेक्टिविटी है जिसे लिमिटेड कनेक्टिविटी भी कहा जा सकता है| आप अगर आगरा या झाँसी के लिए डायरेक्ट बस सेवा पकड़ना चाहें तो मुरेना बस स्टैंड पर आपको नाको चने चबाने पड़ सकते हैं| शहर की सड़के आज भी बेतरतीब है| कनेक्टिविटी एक यक्ष प्रश्न है जिसके बारे में सोच कर ही डोमेस्टिक टूरिस्ट घबरा जाते हैं| अगर डोमेस्टिक टूरिस्ट मोरेना गाँव में दाऊ जी के मेले में आने से कनेक्टिविटी की वजह से घबरा रहा है तो फिर ऐसे शहर में पर्यटन विकास की उम्मीद क्यूँ की जाए|

शहर को टूरिज्म पुलिस या सॉफ्ट पुलिस की सख्त ज़रूरत है|

मुरेना जैसे शहरो में पर्यटन के लिए “टूरिज्म पुलिस” या “सॉफ्ट पुलिस” की भी आवश्यकता होती है, ताकि टूरिस्ट का एक्सपीरियंस अच्छा रहे, मगर पिछले दो दशको में करोडो रूपये का संग्रहालय बनाते वक़्त कभी ये सोचा ही नहीं गया की टूरिस्ट का एक्सपीरियंस किस तरह एन्हांस किया जाए|



मोरेना का नागरिक और स्वतंत्र लेखक होने के नाते, पर्यटन के विकास में व्यस्त प्लानर समिति से मेरी विनम्र अपील है की डेस्टिनेशन का विकास करने के लिए पहले पर्यटन मानचित्र का विकास किया जाए, उस मानचित्र पर आधारभूत सुविधाए जैसे टॉयलेट और सडक विकसित की जाए| मुरेना के बस स्टैंड को मोनोपोली से मुक्त करवाया जाए, पर्यटन पुलिस और सहायता केंद्रो का विकास किया जाए| मुरेना के गौरवशाली अतीत का चित्रांकन करके “टूरिज्म लैंडस्केप” बनाया जाए|  उसके बाद माईबाप, आप जब कर नूराबाद में बोटिंग कीजिये, अगर मेनका गांधी जी की परमिशन मिल जाए तो मछलिया भी पकड लीजिये|



 

 

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