विजन मुरेना 2021 : मुरेना के मेयर का चुनाव करते वक्त “ थिंक ग्लोबल एक्ट लोकल” का नारा भूलिए मत



कोरोना महामारी के चरम में अमेरिका में यही नारा दिया गया था| इस नारे को मूर्त रूप दिया अमेरिका के छोटे और बड़े शहरो के मेयर्स ने| वाशिंगटन डी सी के सिएटल की मेयर जेनी डूरकान ने लॉकडाउन की शुरुआत होते ही अमेरिका के हर शहर के  मेयर के लिए अपील जारी की जिसमे कहा गया की, लोकल स्तर पर महामारी के प्रभावों का अध्ययन किया जा ताकि जब तक महामारी गहन रूप ले, कम से कम लोकल स्तर पर हम कुछ इलाको में जनजीवन सामान्य रख सकें| 

ठीक इसी समय भारत में अरविद केजरीवाल बनाम भाजपा का युद्ध चल रहा था, महामारी से ज्यादा राजनेतिक पार्टियों को दिल्ली में उपलब्ध आई सी यू के बेड्स का क्रेडिट लूटने की ज्यादा चिंता थी| जी न्यूज़ पूरी शक्ति लगाकर तबलीगी जमात के जेनेटिक कोड में कोरोना ढूंढ रहा था| इंडिया टी वी दिल्ली, केरला और पश्चिम बंगाल के हस्पतालो में कोरोना मरीजों की दुर्दशा दिखा रही थी| हमे ये नहीं भूलना चाहिए की कोरोना से लड़ने के मामले में भारतीय अमेरिकन और यूरोपियन लोगो से कहीं ज्यादा मज़बूत साबित हुए हैं| जो हालात अमेरिका में थे वैसे हालात अगर यहाँ होते तो भगवान् की मालिक होता|




एरिज़ोना के एक शहर की मेयर रेजिना रोमेरो ने कोरोना संकट के दौरान हर स्तर पर शहर और प्रशासन के बीच तारतम्य बिठाया और अनलॉक २ के दौरान ही वहां न्यू नार्मल चालू हुआ क्यूंकि शहर के लोग कोरोना के साथ जीने को तैयार थे|




कोरोना संकट के दौरान मेयर क्या भूमिका निभा सकता है इसका एक उदाहरण प्रस्तुत किया अमेरिका में एरिज़ोना के एक शहर की मेयर रेजिना रोमेरो ने| सेकंड अनलॉक के दौरान रेजिना पूरे वक्त शहर की गलियों में लोगो की मदद करती नज़र आई| अपने शहर के लिए नीतिया बनाने हेतु उन्होंने लगातार केंद्रीय महामारी कण्ट्रोल बोर्ड से सम्बन्ध बनाए रखा, और सबसे ज़रूरी बात, चाहे हस्पताल हो या शमशान, कोरोना के कारण सोशल आइसोलेशन का शिकार हुए लोगो और परिवारों के साथ वो लगातार उन्हें ढांढस बंधाती हुयी नज़र आई| 

सच्चा मेयर वो जो लोकल ज़रुरतो को जानता हो, लोकल उद्योगों को पहचानता हो| 

भारत में इस समय ऐ बी पी न्यूज़ और अन्य चैनल लगातार राजनेतिक पार्टियों के कार्यकर्ताओ को चुनोती देने वाली कहानिया चला रहे थे उनका कहना था की चुनाव और मतदान के समय प्रो-एक्टिव राजेनेतिक पार्टियों के कार्यकर्ता कोरोनो काल में कहाँ हैं, यही तो सही समय है समाज सेवा करने का|

पीठ पीछे की तारीफ़ सच्ची तारीफ़ होती है

कोरोना के प्रतिकार में प्रशासन का मृदु चेहरा बनी जिला कलेक्टर प्रियंका दास की शौर्य गाथा बिना वजह की कंट्रोवेर्सिस के बीच अनकही ही रह गयी 
कोरोना काल में मुरेना की जिला कलेक्टर एक विवाद में फँस गयी थी जब उन्होंने गमछे को गलत ठहराते हुए मास्क की अनिवार्यता पर जोर दिया था| पत्रकारों ने इसे मोदी जी के गमछे से जोड़ दिया और प्रियंका दास जी कम से कम दो दिन के लिए देश भर में सुर्खियों में आ गयी| कायदे से उन्हें सुर्खियों में आना चाहिए था पी पी पी मॉडल के कामयाब इम्प्लीमेंटेशन के लिए जिसकी वजह से मुरेनावासियों को कभी किसी ज़रूरी सामान की किल्लत नहीं हुयी| उन्हें सुर्खियों में आना चाहिए था सॉफ्ट पोलिसिंग की पालिसी के अंतर्गत कुछ कड़े आदेशो का पालन करवाने के लिए| सबसे ज़रूरी बात उन्हें सुर्खियों में आना चाहिए था उन कलेक्कोटर ऑफिस से फेसबुक पर ज़ारी हुए उन कोरोना बुलेटिन्स के लिए जिनकी वजह से सोशल मीडिया से जुड़े मुरेना के बहुत सारे लोग कोरोना के दौरान संयम में रहे और भयाक्रांत होकर रातो की नींद नहीं गंवाई|

कोरोना काल में जिस तरह प्रियंका दास जी ने प्रशासन का मृदु और ज़िम्मेदार चेहरा बन कर मुरेनावासियों को आश्वस्त रखा, अमेरिका में वही काम शहर के मेयर कर रहे थे| इस बार शहर का मेयर चुनते वक्त, राजनेतिक पार्टी के साथ मेयर की इस भूमिका के बारे में ज़रूर सोचियेया| याद रहे, आपका चुना हुआ मेयर आपका और आपके शहर का चेहरा दुनिया को दिखाता है| इसलिए अपनी चॉइस थोड़ी अच्छी और ऊंची रखिये, इसी में शहर का और हम सब का भला है|

 


 

  

2 Comments

  1. Ek no. Bhaiya ji sahi likhe hai ek dum kadak

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    1. Thanks for the much needed encouragement brother...

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