मुरेना विज़न 2021 : निकाय स्तर पर जन प्रतिनिधित्व और “मुर्दे की जान को खतरा”

 

हर साल की तरह इस साल भी शहर की गलियों में बसे राजनेतिक मंसूबे पाले नेताओ ने छोटे बड़े hoarding लगा कर मोहल्लेवासियों और नगर वासियों को अपनी अपनी हैसियत के हिसाब से  नव वर्ष की सामजिक बधाई दी है| कल जब आप अपनी गली में निकले तो थोडा फाइन प्रिंट में देखिएगा| इस बार इन राजनेताओ ने शहर को निकाय चुनाव से  पहले से ही छोटे छोटे वार्डस में बाँट दिया है| आप कुछ इस तरह की भाषा यहाँ लिखी पायेंगे| “वार्ड नंबर अडतीस के सभी निवासियों को नववर्ष की शुभकामनाये” | दरअसल ये hoardings राजनेतिक पार्टियों के आकाओ को अपनी शक्ति दिखाने के लिए भी लगाये गए हैं| ऐसा ही कुछ नज़ारा, विधानसभा चुनावो और उपचुनावो में भी नज़र आया था, जब शहर के  एक प्रतिष्ठित डॉक्टर और नव धनाढ्य  व्यवसायिओं ने चुनाव से ठीक पहले जायंट साइज़ hoardings से पहले शहर को पाट दिया था|

क्या सचमुच राजनीति का औधोगिकीकरण हो गया है?

लगता तो ऐसा ही है, इसे समझने के लिए मध्य प्रदेश की राजनीति का परिदृश्य एक नए नज़रिए से देखना पड़ेगा| पिछले दिनों भोपाल से उडी एक चिड़िया ने खबर दी की मध्य प्रदेश राजनीति में सबसे स्ट्रोंग chellenger की हैसियत रखने वाली चम्बल संभाग केन्द्रित पार्टी ने आलरेडी प्रदेश के सारे बड़े शहरो से योग्य उम्मीदवारों के बायोडाटा मंगवाए है| कुछ लोगो का कहना है की ये टिकट बेचे जायेगे, ताकि उम्मीदवार को इस पार्टी के वोट बैंक का लाभ मिल सके| अब जो मैं लिख रहा हूँ उस पर यकीन करना शायद मुश्किल हो, मगर ये सच है, आपकी कॉलोनी, आपके मोहल्ले, आपकी गली में कुछ घरो में पिछले कई दिनों से चुनाव आयोग की वेबसाइट में छपे वोटिंग के आंकड़ो का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है| पिछले चुनावो में काउंटिंग के वक्त उम्मीदवारों के प्रतिनिधि रहे तजुर्बेकार लोग आपकी ही कॉलोनी के नवधनाढय लोगो को अपनी सेवाए दे रहे हैं| एनालिसिस चल रहे हैं, कौनसी गली में अपना अड्डा है, कहाँ पर वोटो में गढ्ढा है, हर तथ्य की पूरी जांच परख हो रही है| आज जो हो रहा है वो इन्वेस्टमेंट है, चुनाव की जीत के साथ इस इन्वेस्टमेंट से प्रॉफिट वसूली का काम भी शुरू हो जाएगा| इस वसूली के क्या परिणाम हो सकते हैं, ये सब तो हमें मुराद नगर में गिरी शमशान की छत ने दिखा ही दिया है| यहाँ शमशान की छत गिरी और बीस से ज्यादा लोग काल का ग्रास बन गए|

बड़ा निर्दयी मन रख कर ये लिखना पड़ रहा है की राजनीती का औधोगिकीकरन और  भ्रष्टाचार का चरम वहां पहुँच गया है जहाँ “जिंदा तो जिंदा, मुर्दों तक की जान को खतरा है|”

गौरतलब ये है की इस शमशान में बने structure को लेकर योगी सरकार पहले की किसी भी सरकार पर कोई आरोप नहीं लगा सकती | इंडिया टी वी के पत्रकार श्री रजत शर्मा ने कल इस घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा की “योगी सरकार की मंशा तो ठीक थी, तीन महीने पहले उन्होंने जन कल्याण के लिए पचास लाख की बड़ी राशि स्वीकृत की थी|” मगर विकास की इस गाथा का बखान करते समय वो ये बताना भूल गए की इस निर्माण कार्य में मुराद नगर के जन प्रतिनिधि की क्या भूमिका थी| आज इस शमशान का ठेकेदार पकड़ा गया है, सिर्फ चार नगर निगम के कर्मचारियो को जेल में डाला गया है| आपको नहीं लगता की पचास लाख में बनी इस शमशान घाट की छत से कमाए गए पैसे का थोडा सा भोग राजनीति के गलियारों में भी लगा होगा| ये वो गलियारे हैं जहाँ सुबह “समाज सेवा चालीसा” पढ़ा जाता है और शाम को  “ कमीशन और घूस का वशीकरण” करने वाले अनुष्ठान रोज़ होते हैं|



इंडिया टी वी पर ये खबर दिखाते समय मुराद नगर के एक लोकल आदमी का बयान भी दिखाया गया| हाथरस की तर्ज़ में इस व्यक्ति से पुलिस ने रोब झाड़ते हुए कहा की “तुम कौन हो और नेतागिरी क्यूँ झाड रहे हो| उस व्यक्ति का जवाब, पुलिस ऑफिसर के चेहरे पर किसी करारे तमाचे से कम नहीं था| उसने कहा की “मुरादनगर एक छोटे से परिवार की तरह है और जो मरे हैं वो सब मेरे परिवारीजन है|” उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनाव हो या फिर मध्य प्रदेश के निकाय चुनाव, मतदाताओ को आज उस कॉमनमेन की आवाज़ सुननी पड़ेगी जब उसने कहा की मुरादनगर एक परिवार की तरह है| हाँ हम सभी एक परिवार है, निकाय चुनाव के प्रतिनिधि चुनते वक्त हमे मौका मिलता है की हम अपने बीच में से एक ऐसे आदमी को सत्ता में पहुंचा दे जो दिन रात हमारे साथ रहता है|

याद रखिये, अगली बार किसी सरकारी ऑफिस की छत आपसे ये पूछ कर नहीं गिरेगी की आपने अपनी जाती वाले को वोट दिया था या नहीं| अगली बार सडक के गढ्ढे से लहराया हुआ ट्रक इस बात की परवाह नहीं करेगा की आप लेफ्ट विंग के हैं या राईट विंग के| ये छत और ट्रक आपसे ये ज़रूर पूछ सकते हैं की आपने एक ईमानदार प्रत्याशी को वोट दिया था या नहीं|



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