२०२१ का मुरेना :- बुलेट राजा के शहर पर नॉलेज इकॉनमी की मेहर


ठीक बीस साल पहले हमने इक्कीसवी सदी का स्वागत किया था| डिजिटल क्रांति, संचार क्रांति और फिर इ-कॉमर्स बूम ने मार्किट और ज़िन्दगी दोनो का नक्शा बदल दिया, सोशल मीडिया क्रांति आई, अमेज़न और फ्लिप्कार्ट ने ग्राहकों को आप्शन दिए| कितना कुछ कितनी तेज़ी से बदला|

पिछले बीस सालो में आपने जिस तेज़ी से बदलाव होते हुए देखे हैं, उससे दुगुनी तेज़ी से अब दुनिया बदलेगी, सबसे बड़ी बात, इस बार दुनिया मुरेना, धौलपुर, डबरा, दतिया और ललितपुर जैसे छोटे शहरो के लिए बदलेगी| इसका सबसे बड़ा कारण होगा नॉलेज इकॉनमी का प्रादुर्भाव| सन २००८ में दुनिया के देशो ने सर्विस इकॉनमी का विदा किया, उससे पहले हम इंडस्ट्रियल इकॉनमी और एग्रीकल्चरल इकॉनमी को विदा कर चुके हैं| नॉलेज इकॉनमी के ज़रिये हम इन सभी को फिर से revive कर रहे हैं जहाँ business idea रूल करेगा और business capital फॉलो करेगा|
पुरानी इकॉनमी बनाम नॉलेज इकॉनमी

 नॉलेज इकॉनमी यानी वो व्यवस्था जहाँ पूँजी की नहीं आईडिया की कीमत होती है| जहाँ आपकी वेबसाइट आपका कमर्शियल रियल एस्टेट बन जाती है| जहाँ पर ऑफिस नहीं वर्चुअल ऑफिस और वर्क फ्रॉम होम का कांसेप्ट काम करता है| पिछले चालीस साल में हमने देखा, बड़े शहर और भी ज्यादा बड़े होते जा रहे थे क्यूंकि जनसँख्या का घनत्व वहाँ बिजनेस के नए अवसर पैदा कर रहा था| हर बड़े ऑफिस के नीचे चाय और सैंडविच की दुकान थी, मकानों के किराये आसमान छू रहे थे, लोकल ट्रांसपोर्ट महंगा था| सैंया, सेलरी तो खूब कमाते थे मगर, रेस्टोरेंट और सिनेमा में सब फूँक आते थे| व्यापारिक स्तर पर देखे तो पता चलता है की, कल तक बड़ा शहर, बड़ा शहर इसलिए भी होता था क्यूंकि वहां लोग इकठ्ठा होते थे, मार्किट प्लेस बन जाता था, व्यापार के सुअवसर बन जाते थे| बारीकी से देखिये, ग्वालियर, झाँसी और आगरा जैसे बड़े मार्किट प्लेस के बारे में सोचिये| व्यापारी और ग्राहक वहां जाना पसंद करते थे क्यूंकि आप्शन ज्यादा मिलते थे| इधर छोटे शहर के व्यापारी बड़ा इन्वेस्टमेंट करने में कतराते थे क्यूंकि छोटे शहरो में लोगो के पास डिस्पोजेबल इनकम नहीं थी|

कौन कहता है छोटे शहरो में पैसा नहीं है?

 सबसे बड़ा उदाहरण आप मुरेना में शहर में देख सकते हैं, पिछले छह महीनो में रिलायंस ट्रेंड और बाटा जैसे दो बड़े ब्रांड अपने शो रूम यहाँ लाये हैं| covid 19 और सोशल distancing की वजह से दोनों ही ब्रांडस ने पिछले साल नुक्सान उठाया है, रिलायंस ट्रेंडस के शुद्ध मुनाफे में 19 परसेंट की गिरावट हुयी थी और बाटा ने इस साल covid की वजह से 44 crore का नुकसान उठाया| इसके बाद भी इसी कोरोना काल में मुरेना में दो ब्रांडेड स्टोर ने दस्तक दी और अब तैयार है मुनाफा कमाने के लिए| ये दोनों स्टोर मुरेना में फायदे का सौदा साबित हो सकते हैं क्यूंकि प्राइम कमर्शियल रियल एस्टेट का दाम और किराया यहाँ कम है| यहाँ सोशल distancing को लेकर उतनी कड़ाई नहीं है| सबसे बड़ी बात इन शहरो की अर्थव्यस्था कृषि पर आधारित है और किसी भी तरह की मंदी का प्रभाव उतनी आसानी से नहीं होता|
बुलेट राजा के शहर पर नॉलेज इकॉनमी की मेहर

 छोटे शहर अब बड़े business केंद्र बनने की राह पर चल चुके हैं, हो सकता है की अगले कुछ सालो में आप सारी बड़ी कार कम्पनीज को मुरेना में फिजिकल शोरूम के साथ देख पाए | ऑटोमोबाइल सेक्टर की बाते करे तो पता चलता है, कुछ साल पहले रॉयल एनफील्ड ने अपना फोकस छोटे शहरो की और किया था, नतीजा ये है की अब मुरेना शहर की गलियों में बुलेट की गुर्राहट सुनना आम बात है| आने वाले समय में येजदी और जावा जैसी मोटरसाइकिल कम्पनीज भी मुरेना जैसे छोटे शहरो का रुख कर सकती है| बाटा, बुलेट और ट्रेंडस जैसे ब्रांड्स का मुरेना में आना दरअसल उस इकनोमिक शिफ्ट का भी नतीजा है जो कहता है की अब डिस्पोजेबल इनकम का कांसेप्ट छोटे शहरो में भी दस्तक दे चुका है| इसमें नॉलेज इकॉनमी का तड़का तब लगेगा जब वर्क फ्रॉम होम का कल्चर आने के बाद लोग अपने ही घरो से काम करेंगे और उनकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा लोकल इकॉनमी के काम आएगा| ऑनलाइन क्लासेज आने के बाद जब विद्यार्थी घर से ही पढ़ाई करेंगे तो शहर की इकॉनमी में एक नया इजाफा होगा| वर्क फ्रॉम होम और स्टडी फ्रॉम होम तो बहुत छोटे सेक्टर्स है, मुरेना जैसे छोटे शहरो की इकॉनमी में नॉलेज इकॉनमी बहुत गहरा असर डालेगी जब दवाईयों का व्यापार और संगठित क्षेत्र के व्यापार virtualization की रह पकड़ लेंगे और business web page पैसा कमाने का नया जरिया बन जायेंगे| 
 
न्यू नार्मल का ज़माना आ गया 

 आज हमें पोस्ट कोरोना वर्ल्ड और न्यू नार्मल की व्यवस्था को समझना होगा, इकॉनमी के शिफ्ट को ध्यान में रख कर अगले दस साल प्लान करने होगे| हमे समझना पड़ेगा की डिजिटल क्रांति ने अर्थव्यस्था की सुई को छोटे शहरो की तरफ घुमाया था, covid ने इसे रफ़्तार दी और अब नॉलेज इकॉनमी का प्रादुर्भाव इन शहरो को अर्थव्यस्था की धुरी में तब्दील कर देगा| पिछले कुछ सालो के आंकड़ो पर नज़र डाले तो समझ आता है की पिछले दस सालो में छोटे शहरो में ऑनलाइन business ने चालीस प्रतिशत से ज्यादा ग्रोथ रेट दर्ज की है, अगर इसी आंकड़े को नॉलेज इकॉनमी के नज़रिए से देखा जाए तो पता चलता है की आने वाले दस सालो में बहुत सारे बड़े business अपना बेस शिफ्ट करके छोटे शहरो का रुख करेंगे|

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